शंभू, शिव शंभूभोलेनाथ!
जब जिद पे आ गई पार्वती, पार्वती, पार्वतीसमझाने पहुँचे सप्तऋषि, सप्तऋषि, सप्तऋषि
काय जिद कर रहीं? काय को मर रहीं?काय जिद कर रहीं? काय को मर रहीं ऐसे वर के लाने?काय जिद कर रहीं? काय को मर रहीं ऐसे वर के लाने?
जाके सीस पे गंगा और गले में डारैं फिर रहे साँपजाके सीस पे गंगा और गले में डारैं फिर रहे साँपइतने सीधे-साधे हैं, सब कहते, "भोलेनाथ", "भोलेनाथ"जाके सीस पे गंगा और गले में डारैं फिर रहे साँपइतने सीधे-साधे हैं, सब कहते, "भोलेनाथ", "भोलेनाथ"
ना खपरा, ना छपरा, ना फूँस की धरैं मड़इयाका खावे, को धरौ वहाँ, बस रोवत रहत लड़इयाना खपरा, ना छपरा, ना फूँस की धरैं मड़इयाका खावे, को धरौ वहाँ, बस रोवत रहत लड़इया
भेष धरैं अवधूत फिरैं, अब तुमसे का कहें, बिन्नूटोड़ा-डँगड़ ले घूमें, वे बिनकैं कछुए नइयाँके बिनकैं कछुए नइयाँ
काय जिद कर रहीं? काय तप कर रहीं?काय जिद कर रही? काय को मर रही ऐसे वर के लाने?हाँ, ऐसे वर के लाने
जाके सीस पे गंगा और गले में डारैं फिर रहे साँपजाके सीस पे गंगा और गले में डारैं फिर रहे साँपइतने सीधे-साधे हैं, सब कहते, "भोलेनाथ", "भोलेनाथ"जाके सीस पे गंगा और गले में डारैं फिर रहे साँपइतने सीधे-साधे हैं, सब कहते, "भोलेनाथ", "भोलेनाथ"
शंभू, शिव शंभूभोलेनाथ!
जटा-लटा ना कबहूँ सँवारे, दीसत महा भयंकरमूड़ पे आधो चंदा और बेला पे घूमे शंकरजटा-लटा ना कबहूँ सँवारे, दीसत महा भयंकरमूड़ पे आधो चंदा और बेला पे घूमे शंकर
राम नाम के रसिया हैं वे, और उन्हें का चाहनेकामदेव के मर्दनहारी, घर-गृहस्थी का जानेवे घर-गृहस्थी का जाने
काय जिद कर रहीं? काय को मर रहीं?अरे, काय जिद कर रहीं? काय तप कर रही ऐसे वर के लाने?बिन्नू, ऐसे वर के लाने
जाके सीस पे गंगा और गले में डारैं फिर रहे साँपजाके सीस पे गंगा और गले में डारैं फिर रहे साँपइतने सीधे-साधे हैं, सब कहते, "भोलेनाथ", "भोलेनाथ"जाके सीस पे गंगा और गले में डारैं फिर रहे साँपइतने सीधे-साधे हैं, सब कहते, "भोलेनाथ", "भोलेनाथ"
भोले, बम भोलेभोले, बम भोलेभोले, बम भोले
जय-जय शिव शंभू!